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शीतयुद्ध का अर्थ
- शीत युद्ध
का तात्पर्य
ऐसे वातावरण
से है
जिसके अंदर
युद्ध होने
की स्थिति
बनी रहती
है और
शीत युद्ध
1945 में USA और
USSR के बीच
हुआ था
शीत युद्ध होने के कारण क्या थे
1. वर्चस्व की लड़ाई
-1945 में जब
शीत युद्ध
शुरू हुआ
इसका मुख्य
कारण वर्चस्व
की लड़ाई
थी यूएसए
का मानना
था कि
वह पूरे
विश्व में
सबसे शक्तिशाली
है जबकि
है यूएसएसआर
का मानना
था कि
वह पूरे
विश्व में
सबसे शक्तिशाली
हैं
2. अलग अलग गुणों का होना
-1945 के बाद
बहुत से
देश आजाद
हुए जिनमें
से कोई
अमेरिका की
गुट में
शामिल हो
गया तो
कोई यूएसएसआर
के गुट
में शामिल
हो गया
यूएसएसआर ने
जो अपना
गुट बनाया
उसे WARSAPACT का
नाम दिया
गया और
अमेरिका ने
गुट बनाया
उसे नाटो
का नाम
दिया गया
3. क्यूबा मिसाइल संकट
- अप्रैल 1962 में
क्यूबा मिसाइल
संकट शुरू
हुआ कि
वह को
आर्थिक सहायता
यूएसएसआर दे
रहा था
उस समय
यूएसएसआर का
शासन निकित
था यूएसएसआर
ने क्यूबा
में 1961 से
अपने परमाणु
हथियार रखना
शुरू कर
दिया ताकि
युद्ध के
समय यूएसए
के ऊपर
आसानी से
आक्रमण कर
सके अमेरिका
को इसका
पता चला
तो उसने
भी अपने
मंत्री क्यूबा
में लाकर
खड़ा कर
दिया
4. विचारधारा का अलग अलग होना
- अमेरिका और
यूएसएस दोनों
ने ही
अलग-अलग
विचारधारा अपना
रखी थी
USA ने पूंजीवाद
को अपना
रखा था
वही यूएसएसआर
ने साम्यवादी
को अपना
रखा था
5. USA OR USSR
- दोनों ही
देशों ने
परमाणु हथियारों
को बढ़ावा
अधिक मात्रा
में देना
शुरू कर
दिया और
उसी प्रक्रिया
में शीत
युद्ध को
बढ़ावा दिया
गया
6. बर्लिन की दीवार
-1961 में
बर्लिन
की
दीवार
बनी
जिस
पर
अमेरिका
और
USSR ने
कब्जा
कर
रखा
था
यूएसए
ने
उसे
स्वतंत्र
कर
दिया
और
USSR ने
उसे
अपने
कब्जे
में
ले
लिया जिससे उन दोनों के मध्य मतभेद उत्पन्न हुआ
7. युवाओं में यूएसएसआर की भूमिका
- विशेष
अधिकारी
USSR ने
UNO वीटो
पावर
का
इस्तेमाल
किया
जिसके
कारण
अनेक
राज्यों
UNO के
मेंबर
नहीं
बन
सके
साथ
ही
अनेक
महत्वपूर्ण
मुद्दे
विफल
रहे
शीत युद्ध का प्रभाव
1. पूरा विश्व दो गुट में बट गया - सिटी
उसका पूरे
विश्व पर
यह प्रभाव
पड़ा कि
पूरा विश्व
दो गुटों
में बैठ
गया एक
था (अमेरिका
व यूएसएसआर)
विश्व विश्व
की तरह
दिखाई ना
दे कर
केवल 2
गुट दिखाई
दे रहे
थे
2. हथियारों की होड़ को बढ़ावा-
1945 के बाद शुरू
हुए शीतयुद्ध
का एक
प्रभाव यह
भी बड़ा
कि पूरा
विश्व में
हत्यारों को
बहुत अधिक
मात्रा में
बढ़ावा दिया
गया
3. पूरे विश्व में डर फैल गया - शीतयुद्ध
दो महा
शक्तियों के
बीच चला
जिसमें दोनों
ही महा
शक्तियों के
पास परमाणु
हथियारों की
कमी नहीं
थी जिससे
पूरे विश्व
को डर
लगने लगा
कि इन
दोनों के
बीच युद्ध
हो गया
तो इससे
सारा विश्व
समाप्त हो
जाएगा
4. गुट निरपेक्षता का उदय
- शीतयुद्ध का
एक प्रभाव
यह भी
पड़ा कि
दोनों गुटों
से अलग
रहने के
लिए एक
गुट और
बनाया गया
गुट निरपेक्षता
गुटनिरपेक्षता का
उदय शीत
युद्ध के
कारण ही
हुआ
गुटनिरपेक्षता का अर्थ
गुटनिरपेक्षता
का अर्थ
है कि
किसी के
भी गुट
में शामिल
ना होना
और अपना
एक अलग
गुट बनाना
गुट निरपेक्षता
का पहला
सम्मेलन 1961 में
हुआ इसमें वर्तमान
में 115 सदस्य
हैं पहले
25 सदस्य थे
भारत ने भी गुट निरपेक्षता को अपनाया
गुट निरपेक्षता को अपनाने के कारण
1. भारत किसी भी देश का दुश्मन नहीं बनना चाहता था
- भारत ने
दोनों देशों
में से
किसी भी
गुट में
शामिल हो
ना इसलिए
सही नहीं
समझा क्योंकि
भारत यदि
एक गुट
में शामिल
हो जाता
तो वह
खुद ही
दूसरे गुट
का दुश्मन
बन जाता
2. भारत अपना स्वतंत्र विकास करना चाहता था
- भारत ने
गुटनिरपेक्षता को
इसलिए अपनाया क्योंकि
भारत को
आजाद हुए
ज्यादा समय
नहीं हुआ
था और
भारत को
अपना विकास
करना था
ना कि
हथियारों की
होड़ में
पढ़ना था
3. भारत हथियारों की होड़ में नहीं पड़ना चाहता था
- भारत एक
शांतिप्रिय देश
रहा है
वह इसलिए
ही भारत
में गुटनिरपेक्ष
को अपनाया
था कि
हथियारों की
होड़ को
दबाव बना
दें
4. भारत किसी भी देश का गुलाम नहीं बनना चाहता था
- भारत आजाद
होने के
बाद दोनों
में से
किसी भी
गुट को
नहीं अपनाया
क्योंकि भारत
जानता था
कि यदि
गुट में
शामिल हुआ
तो भारत
को उसके
अनुसार ही
कार्य करना
पड़ेगा यह
स्थिति गुलाम
देश की
तरह होगी
और भारत
यह नहीं
चाहता था
कि वह
किसी देश
का गुलाम
बने
5. भारत दोनों खेमों से सहायता प्राप्त करना चाहता था - वह
चाहता था
कि अमेरिका से
सहायता की
जरूरत पड़े
तो अमेरिका
से सहायता
मिल सके
और तब
यूएसएआर सहायता
की आवश्यकता
पड़े तो
यूएसएसआर से
सहायता ली
जा सके
क्योंकि भारत
अभी स्वतंत्र हुआ
ही था
इसलिए भारत
ने ताकि
दोनों गुटों
से सहायता
प्राप्त कर
सके गुटनिरपेक्षता
को अपनाया
देतांत का अर्थ
- बेशक USA और
USSR के
बीच शीत
युद्ध चल
रहा था
परंतु फिर
भी कुछ
मुद्दे ऐसे
थे जिस
पर USA और
USSR साथ दोनों
सहमत थे इनके
निम्नलिखित कारण
थे
1.
स्वयं के विकास को बढ़ावा देने की कल्पना
- USSR और USA देसीच्यूट
के दौरान
इस बात
को जांचा
की दोनों
को आपसी
लड़ाई को
छोड़कर आपसी
विकास को
बढ़ावा देना
चाहिए
2.
निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देना
- USA और USSR दोनों
ही हत्यारा
में पैसा
खर्च कर
रहे थे
इसलिए दोनों
ने निशस्त्रीकरण
को बढ़ावा
दिया ताकि
हथियारों पर
पैसा खर्च
ना करके
आपसी विकास
को बढ़ावा
दिया जा
सके
3. अंतर्राष्ट्रीय शांति में सहयोग
- USA और USSR दोनों
ही अंतरराष्ट्रीय
शांति को
बढ़ावा देना
चाहते थे
दोनों भली-भांति
जानते थे
कि यदि
शीत युद्ध
चलते दोनों
के बीच
युद्ध हुआ
तो उससे
सारा संसार
नष्ट हो
सकता है.
4.
यूएनओ में सहयोग
- शीतयुद्ध के दौरान
USSR और USA दोनों
ही एक
दूसरे के
खिलाफ वीटो
पावर का
इस्तेमाल करते
थे परंतु
अब अनेक
मुद्दे पर
दोनों ही
एक दूसरे
को सहयोग
देते हुए
नजर आ
रहे थे
5. गुट निरपेक्षता के अधिक शक्तिशाली बन जाने का डर
- दोनों का
डर था
कि कहीं
गुट निरपेक्षता
हमसे ज्यादा
शक्तिशाली ना
बन जाए
USA और USSR दोनों
ने एक
दूसरे का
सहयोग देना
शुरू किया
क्योंकि दोनों
ही देशों
को डर
था कि
कहीं वे
आपस में
लड़ते ना
रह जाए
और कहीं
गुट निरपेक्षता
इन दोनों
से भी
शक्तिशाली ना
बन जाए
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