Unit 3
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क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय व्यापार समझौता एवं संस्थान
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क्षेत्रीय व्यापार समझौता एक आर्थिक व्यापार समझौता है जो किसी विशेष क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 2 या उससे अधिक देशों के बीच व्यापार पर लगे प्रतिबंध को कम करने के लिए क्या जाता है वर्तमान में ऐसे( जुलाई 2007)
205 समझौते परिचालन में हैं क्षेत्रीय व्यापार समझौते विविध रूपों में है जिनमें से कुछ समझौते जटिलता लिए हैं जैसे यूरोपीय संघ जबकि कुछ समझौते अधिक सक्रिय नहीं है जैसे उत्तरी अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता( नाफ्ता) क्षेत्रीय व्यापार समझौते प्राथमिक समझौते हैं विविध रूप में अपने सदस्य देशों के लिए आर्थिक व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराते हैं
Ø एक क्षेत्रीय व्यापार समझौता मुक्त व्यापार समझौता हो सकता है जब से देशों के अलावा एक सीमित क्षेत्र से बाहर के सदस्य राष्ट्रीय के लिए नियम और विनिमय उदारता अपनाते हुए प्रतिबंधित आर्थिक सीमा कम करता है
Ø एक क्षेत्रीय व्यापार समझौता सीमा संघ हो सकता है ऐसी पद्धति में दो या अधिक सीमा क्षेत्र संघ मुक्त व्यापार करते हैं यह कभी-कभी बाहिय राष्ट्रीय के साथ बी वस्तुओं के आयात निर्यात पर शुल्क के रूप में व्यापार का मुक्त संचालन कर सकते हैं
Ø एक क्षेत्रीय व्यापार समझौता सदस्य राष्ट्रीय के बीच एक क्षेत्रीय आर्थिक समझौते का रूप भी ले सकता है जिन के अंतर्गत, पूंजी, वस्तुओं एवं सेवाओं के मुक्त आवागमन के साथ-साथ एक सामान्य मुद्रा और सामान्य आर्थिक नीति को अपनाया जा सकता है वर्तमान में बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में क्षेत्रीय व्यापार समझौता बहुत महत्व पूर्ण रूप से सामने आया है
बहुपक्षीय व्यापार समझौता एक साथ कुछ देशों के साथ किया जा सकता है इसके लिए एक दूसरे की नीतियां को समझना शुरु में थोड़ा कठिन होता है पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद वह बहुत प्रभावशाली हो जाते हैं बहुपक्षीय समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी देशों के साथ समान व्यवहार किया जाता है ‘ दोहा सम्मेलन’ समझौता क्षेत्रीय व्यापार संगठन के सभी सदस्यों के बीच एक बहुपक्षीय व्यापार समझौता है
वर्तमान में अनेकों व्यापारिक समझौते प्रचलन में है
Ø “गेट”(geet)(
व्यापार एवं प्रशुल्क का सामान्य समझौता)
Ø “गेट्स
(geets)(व्यापार एवं सेवा का सामान्य समझौता) इसके अंतर्गत स्वास्थ्य
Ø सेवा, जल एवं अन्य सेवा को भी शामिल किया जाता है
Ø बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधित व्यापारिक समझौता (ट्रिप्स) इसके तहत वस्तुओं एवं सेवाओं की कॉपीराइट, व्यापार मार्ग के साथ साथ सॉफ्टवेयर से लेकर दवाएं तक को शामिल किया जाता है
Ø कृषि समझौता
Ø स्वच्छता एवं शारीरिक स्वच्छता समझौता
Ø व्यापारिक तकनीकी बाधाएं समझौता
Ø (ट्रिमस) “व्यापार संबंधित
निवेश मानक” इसके तहत उन नियमों और
विनियमों को शामिल किया जाता है जो विभिन्न देशों में विदेशी निवेश पर लागू होते
हैं तथा निजी स्वास्थ्य आपूर्ति और दवा उत्पादन से संबंधित होते हैं
Ø एंटी
डंपिंग एक्ट
Ø सीमा
मूल्यांकन समझौता
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2. बहुपक्षीय संस्थाएं :संरचना/संगठन एवं कार्य अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
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इसकी स्थापना 22 जुलाई 1944 को हुई थी इसका आरंभिक उद्देश्य आर्थिक सहयोग के लिए एक मार्गदर्शन का निर्माण करना था जो विश्व वैश्विक मंदी से जूझ रहे देशों की आर्थिक नीतियों को मुश्किलों का सामना करने लायक बना सके तथा जिन देशों मैं आर्थिक मंदी ने अपना प्रभाव बनाया वहां वैश्विक प्रतिस्पर्धा कम हो सके यह रोजगार का निर्माण तथा गरीबी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है यह विनिमय दर को प्रोत्साहित करती है तथा साथ ही अंतरराष्ट्रीय भुगतान को बढ़ावा देती है यह सदस्य देशों को ऋण देती है साथ ही उसके सहज भुगतान की भी व्यवस्था करती है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष 185 देशों का संगठन है जो वैश्विक मुद्रा सहयोग,
वित्तीय
स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ावा, बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन, सतत आर्थिक विकास आर्थिक स्थिरता के लिए कार्य करती है यह अपने सदस्य राष्ट्रों को आर्थिक नीति व समस्याओं में
सहायता करती है विकासशील देशों से गरीब हटाने की प्रक्रिया में मदद करती है आर्थिक समस्याओं से घिरे हुए सदस्य देशों की यह मदद करती है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्य
Ø वैश्वीकरण के माध्यम से, आर्थिक रूप से कमजोर देशों की सहायता करना आईएमएफ का एक महत्वपूर्ण कार्य है
Ø वह सदस्य राष्ट्रों की सरकार तथा केंद्रीय बैंक को अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर आर्थिक स्थिति को समझते हुए नीति निर्माण में सलाह देती है
Ø आर्थिक कठिनाइयों से उबरने के लिए सदस्य देशों को ऋण मुहैया कराती है
Ø विकासशील देशों को गरीबी से निपटने के लिए सब्सिडी आधारित ऋण मुहैया कराती है
Ø आर्थिक प्रबंधन में सुधार के लिए सदस्य राष्ट्र को तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था करती है
Ø वैश्वीकरण के दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर निरंतर आईएमएफ के द्वारा नए कार्य किए जा रहे हैं
Ø आईएमएफ द्वारा ऋण मुहैया कराना :- आईएमएफ अपने ऋण देने की व्यवस्था में सहयोगी सदस्य देशों को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहा है इसने उन देशों को भी सहायता देने की कोशिश की है जॉकी इंधन और खाद्य संकट से प्रभावित है
Ø वैश्विक आर्थिक संतुलन में सहायता करता :-
आईएमएफ किसी विशेष मुद्दे पर चर्चा करने के लिए, बहुपक्षीय सुझाव पाने के लिए कुछ चुने हुए देशों को बुला सकता है, जिससे कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए एक नई दिशा मिल सके
Ø गरीबी निवारण के लिए कार्य करना :-
आज विश्व की कुल जनसंख्या में करोड़ों लोग ऐसे हैं जिन्हें प्रतिदिन $1 पर अपना जीवन निर्वाह करना पड़ रहा है तथा करोड़ों लोग कुपोषण का शिकार हैं इन गरीब आय वाले देशों में आईएमएफ की भूमिका में परिवर्तन आया है क्योंकि अब इन देशों में आर्थिक वृद्धि हुई है तथा उन तरीकों की खोज जिससे गरीबी को कम किया जा सके
Ø आईएमएफ के नियमों में सुधार करना :-
मई 2008 में इसके सदस्य देशों ने एक दोवर्षीय पैकेज की व्यवस्था की है
Ø अधिक उत्तरदायित्व निभाना :- आईएमएफ अपने सदस्य देशों के स्वास्थ्य परीक्षण का रिपोर्ट प्रति वर्ष प्रकाशित करती है
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3. आईएमएफ की संरचना
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IMF का कार्य एक प्रबंधक दल के सहयोग से 17 विभागों द्वारा संचालित किया जाता है जो सदस्य देशों की नीतियों, विश्लेषण क्षमता और तकनीकी कार्य मैं सहायता करते हैं एक विभाग आईएमएफ के संसाधनों के प्रबंधन का दायित्व निभाता है यह आईएमएफ मैं आपको बताता है कि कहां से राजसव में वृद्धि की जा सकती है तथा उस का बेहतर उपयोग कैसे हो सकता है आईएमएफ ने वर्तमान में 2,600 कर्मचारियों की भर्ती की है जिनमें से 50 प्रतिशत आर्थिक विशेषज्ञ हैं आईएमएफ के मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में कार्य करते हैं जबकि उनमें से कुछ सदस्य देशों मैं स्थाई प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं आईएमएफ में वर्तमान में 185 सदस्य राष्ट्रीय हैं इसकी सदस्यता पाने के लिए एक देश को आवेदन करना पड़ता है जब सदस्य राष्ट्रीय द्वारा आम सहमति मिल जाती है तो आवेदक देश को आईएमएफ की सदस्यता मिल जाती है सदस्यता प्रदान करते समय देश उसके क्षेत्र आर्थिक स्थिति के अनुसार कोटा का निर्धारित करते हैं
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4. बोर्ड ऑफ गवर्नर
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बोर्ड ऑफ गवर्नर आईएमएफ में निर्णय निर्माण करने वाला सर्वोच्च अंग है यह एक गवर्नर तथा एक उप गवर्नर जो कि प्रत्येक सदस्य राष्ट्र से चुने जाते हैं उससे मिलकर बना होता है गवर्नर की नियुक्ति सदस्य राष्ट्र द्वारा की जाती है जो कि उस देश के वित्त मंत्री होते हैं या केंद्रीय बैंक के प्रमुख होते हैं बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा अपने अधिकांश कार्य तथा शक्तियां, आईएमएफ के कार्यपालिका बोर्ड को सौंप दी जाती है तथा कुछ शक्तियां जैसे कोटा में वृद्धि करने का अधिकार, विशेष निकासी अधिकार, नए सदस्यों का प्रवेश, सदस्यों का निष्कासन तथा समझौते के अनुच्छेद तथा अधिनियम में संशोधन का अधिकार भी अपने पास ही रखते हैं बोर्ड ऑफ गवर्नर कार्यपालिका के निदेशकों का चुनाव व उनकी नियुक्ति करता है यह आईएमएफ के एग्रीमेंट के अनुच्छेद संबंधित किसी भी मुद्दे पर अंतिम भूमिका निभाता है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का 24
सदस्य कार्यपालिका बोर्ड ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के दैनिक कार्यों की देखरेख करता है यह 24 सदस्य कार्यपालिका बोर्ड सभी 185 देशों का प्रतिनिधित्व करता है आईएमएफ द्वारा निरमोहिया कराने का अर्थ होता है उन सदस्य देशों को सहायता देना जो भुगतान संतुलन की समस्या से जूझ रहे हैं तथा उनको आर्थिक स्थायित्व की आवश्यकता है वे सतत आर्थिक विकास को पुन प्राप्त करने की इच्छा भी रखते हैं
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5. विश्व बैंक
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विश्व बैंक की नीव 1944 मैं अमेरिका ब्रेटन वुड्स सम्मेलन किया विश्व बैंक एकल अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में व्यापक परिवर्तन लाने के साथ-साथ अन्य पांच विकास संस्था के साथ जुड़कर अस्तित्व में आया वह पांच अन्य संस्थाएं जो विश्व बैंक में सम्मिलित किए गए हैं वह इस प्रकार है
1. अंतरराष्ट्रीय विकास एवं पुनर्निर्माण बैंक(IBRD)
2. अंतर्राष्ट्रीय विकास मंच(IDA)
3. अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम(IFC)
4. बहुपक्षीय निवेश गारंटी संस्था(MIGA)
5. निवेश विवादों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र(ICSID)
इन 5 में से दो प्रमुख हैं
1.
(IBRD) 2.(IDA)
Ø IBRD को ही वर्ल्ड बैंक कहते हैं जो विकासशील देश हैं उन देशो की आर्थिक व्यवस्था को फिर से विकास करने के लिए उनको लोन देती है
Ø IDA जो देश पहले से विकसित हैं और विकास करना चाहते हैं उनका विकास करने में मदद करती है और यह उधार देने वाली विश्व की सबसे बड़ी संस्था है तथा जोड़ दिया जाता है उसकी प्राप्ति 30 40 साल के बाद प्राप्त की जाती है
वर्ल्ड बैंक क्या करती है
Ø वर्ल्ड बैंक लोन देती है कम ब्याज पर या बिना ब्याज के जैसे कि डैम बनाने के लिए या कोई कार्य जिसमें ज्यादा पैसा लग रहा हूं उसके लिए रेलवे ट्रेक बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से सबसे पहले लोन फ्रांस ने लिया था भारत ने वर्ल्ड बैंक से सबसे पहले लोन 1948 में लिया था( 62 बिलियन अमेरिकी डॉलर था) वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ दोनों ही एकता शक्ति का संगठन है और यह दोनों यूएनओ के संगठन है
Ø वर्ल्ड बैंक की स्थापना 1944 में हुई वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या 189 है इसका 189
नौरू है( 12 अप्रैल 2016) में बना था अगर कोई देश वर्ल्ड बैंक की सदस्यता चाहता है तो पहले उसको आईएमएफ की सदस्यता लेनी पड़ेगी
Ø वर्ल्ड बैंक का प्रमुख उद्देश्य है पूरी दुनिया से गरीबी हटाना वह हर देश का सतत विकास करना वर्ल्ड बैंक के वर्तमान अध्यक्ष जिम योंग किंग है 1 जुलाई 2012 से अब तक
Ø दूसरे विश्व युद्ध ने ना केवल बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को असंतुलन कर दिया था बल्कि अनेक राष्ट्रीय में जीवन एवं संपत्ति को भी अत्यधिक क्षति पहुंची थी युद्ध में सक्रिय भाग लेने वाले देशों -
जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड आदि की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से खराब हो गई थी अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था के लिए यह जरूरी था कि इन युद्ध प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं के पुन निर्माण पर ध्यान दिया जाए साथ ही अल्पविकसित देशों के योजना के अनुसार विकास के जाने पर विचार किया गया इन्हीं उद्देश्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्था ने एक दूसरे से हाथ मिला कर कार्य करने का संकल्प लिया
1. गरीब देशों में( विशेष रूप से अफ्रीकी देशों में) गरीबी को कम किया जाए तथा सतत विकास को सुनिश्चित किया जाए
2. युद्ध प्रभावित देशों की चुनौतियों के समाधान समाधान तथा कमजोर देशों के लिए विकास के विकल्प तलाशें जाएं
3. वैश्विक क्षेत्रीय मुद्दे जैसे -
जलवायु परिवर्तन, संक्रमण सील बीमारियां तथा विश्व व्यापार पर विचार विमर्श किया जाए
4. अरब जगत में विकास तथा अवसर पर कार्य किया जाए
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